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(ये कहानी काल्पनिक है इसका जीवित या मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है और अगर ऐसा होता है तो इसे मात्र एक संयोग कहा जाएगा)

पूरे गांव में सन्नाटा छाया था...लोग दुखी थे लेकिन लोक लिहाज के मारे अपना दुख बयां करने से डर रहे थे...घर में दो लाशें पड़ी थी लेकिन इन लाशों का क्या किया जाए किसी को समझ नहीं आ रहा था...किसी ने सुझाव दिया कि पुलिस को खबर कर देते हैं...तो कोई बोला अरे गांव की बदनामी हो जाएगी चलो बगीचे में ही दफना देते हैं...अरे दीदी को तो आ जाने दो रघुवीर रोते हुए बोला...अभी कुछ दिन पहले तो सबकुछ ठीक था सीमा मान भी गई थी फिर इन लोगों ने ये कदम क्यों उठा बोलते हुए सीमा की ताई बोली... 

रघूवीर वैसे तो पढ़ा-लिखा नहीं था लेकिन उसके बाबू जी के मरने के बाद उसे उनकी नौकरी मिल गई...सरकारी नौकरी थी और तनख्वाह भी अच्छी थी...लेकिन एक दिन उसके एकलौते बेटे ने घर में फांसी लगाकर जान दे दी...तबसे वो बहुत टूट गया था...
रघूवीर की तीन बेटियां थी जिनमें से दो की शादी हो गई थी वहीं सबसे छोटी बेटी कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी...रघुवीर की बहन अपने बेटे नीरज को रघुवीर के पास ही छोड़ गई थी जिससे उसका मन लगा रहा...नीरज भी उसी कॉलेज में जाने लगा जहां सीमा पढ़ती थी...

धीरे-धीरे नीरज रघुवीर से घुल-मिल गया वो अब बेटे के गम से बाहर आ चुका था...नीरज में उसे अपने बेटे की छवि दिखती थी...नीरज और सीमा भी एक दूसरे से काफी घुल-मिल गए थे लेकिन ये घुलना मिलना कुछ अलग ही रूप ले रहा था...दोनों एक दूसरे के प्यार में पड़ गए थे...इन दोनों पर किसी को शक भी नहीं होता था क्योंकि सबकी नजर में तो दोनों भाई-बहन थे...आस पड़ोस में तो बातें भी होने लगी थी कि दोनों का चक्कर चल रहा है लेकिन रघुवीर और उसकी पत्नी को इसकी भनक तक ना थी...वो कहते हैं ना कि इश्क और दर्द छिपाए नहीं छिपता तो आखिर कबतक ये सब छिपता...एक दिन सीमा की मां ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया...वो सीमा को कमरे से आंगन में लेकर आईं और जोर जोर से उसे मारने लगीं...

नीरज ने बचाने की कोशिश की तो उसे धक्का देकर अलग कर दिया...

चीखने चिल्लाने की आवाज सुनकर रघुवीर और आस-पास के लोग भी इक्ठ्ठा हो गए...

रघुवीर को जब पूरी बात पता चली तो उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा रहा था कि वो क्या करें ना चाहते हुए भी उसने पहली बार सीमा पर हाथ उठाया था...

सीमा रघुवीर के पैरो से लिपट गई बोली पापा में नीरज से बहुत प्यार करती हूं हम शादी करना चाहते है...

रघुवीर ने अपना पैर झटक दिया...

फिर नीरज भी हाथ जोड़ने लगा बोला कि मैं हमेशा खुश रखूंगा सीमा को आप हमारी शादी करा दीजिए...

रघुवीर ने नीरज का हाथ पकड़ा और उसको घर से निकाल दिया और वापस अपने घर जाने के लिए कहा...

उधर रघुवीर के समधी ननकू भी ये सब सुनकर शाम तक रघुवीर के घर आ गए....दोनों बात ही कर रहे थे तभी रघुवीर की बहन का फोन आ गया...

नीरज की मां दोनों की शादी के लिए राजी थी और अपने भाई को भी मना रही थी कि वो दोनों की शादी करा दें लेकिन तभी ननकू ने फोन छीन लिया और बोला कि “सुनों अपनी औकात देख लो पहले खाने के लाले पड़े है और चली हैं बेटे का ब्याह रचाने”

ये बोलते हुए ननकू ने फोन रख दिया। सीमा लगातार जिद किए जा रही थी कि मुझे नीरज से ही शादी करनी है मुझे उसके पास जाने दो... ननकू सीमा के पास आया और उसे मारते हुए बोला कि बहुत पंख निकल आए हैं ना तेरे... आज काटता हूं उन्हें...

ननकू ने सीमा की मां से केंची मंगवाई और सीमा के पूरे बाल काट दिए... रघुवीर और उसकी पत्नी चुपचाप तमाशा देखते रहे, उनकी कुछ बोलने की हिम्मत ही नहीं हुई क्यों यहां समधी सर्वोच्च होते थे... सीमा बिल्कुल शांत हो चुकी थी उसके मुंह से एक आवाज तक ना निकली... रात हुई, सीमा मां ने उससे कहा कि वो जाकर ननकू को खाना दे आए...

डरी सहमी सी सीमा खाना लेकर जा रही थी वो कमरे के अंदर घुसने ही वाली थी लेकिन उसने ने जो सुना उससे उसके पैर वहीं जम से गए...
अंदर ननकू रघुवीर को समझा रहा था कि मिट्टी का तेल डालकर जला देते हैं और गांव वालों से बोल देंगे कि शादी करने की जिद में आत्महत्या कर ली...

सीमा को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे डर के मारे वो पसीने से नहा चुकी थी लेकिन उसने थोडी सी हिम्मत दिखाई और दरवाजा खटखटा के बोली पापा खाना लाई हूं...

ननकू चुप हो गया और रघुवीर ने दरवाजा खोलकर खाने की थाल सीमा के हाथ से छीन ली और फिर दरवाजा बंद कर लिया...

सीमा के पास ये अच्छा मौका था वो चुपके से अपनी ताई के पास गई जो कि बिल्कुल बगल के घर में रहती थीं और उन्हें पूरी बात बताई...

ताई से वैसे तो बोलचाल ना थी लेकिन आजकल ना जाने क्यों वो बहुत हमदर्दी दिखा रही थी...

ताई ने सीमा को घर जाने के लिए बोला और ठीक रात एक बजे किसी भी तरह से बाहर मिलने के लिए कहा...

सीमा वापस घर आ गई और एक बजने का इंतजार करने लगी...

उधर ताई ने नीरज की मां को फोन करके पूरी बात बताई कि वो लोग आज सीमा को जला देंगे...

ताई ने नीरज की मां से कहा कि वो नीरज को रात में गांव के बाहर भेज दे सीमा उन्हें वहीं मिलेगी।

सीमा ने देखा कि रात के साढ़े बारह बज रहे थे घर में सभी लोग गहरी नींद में थे...

सीमा चुपके से उठी और छत के रास्ते अपनी ताई के घर में गई...

ताई ने चुपके से उसे बाहर निकाल दिया और बता दिया कि गांव के बाहर नीरज इंतजार कर रहा है।

सूबह हुई तो पूरे गांव में हाहाकार मचा हुआ था गांव के बाहर जो नीम का पेड़ था उसपर सीमा और नीरज की लाश फंदे से लटकी हुई थी।


लोगों ने रघुवीर को बुलाया रघुवीर और उसकी पत्नी दोड़ते हुए वहां पहुंचे...

लाश देखते ही रघुवीर की पत्नी बेहोश हो गई ... लाश को नीचे उतारा गया लोग आपस में बात करने लगे की शादी नहीं कराई तो दोनों ने आत्महत्या कर ली...

नीरज के घर फोन किया गया कि लाश को ले जाए जहां एक तरफ मातम छाया था वहीं ननकू और ताई एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे....