pic source: google
शशांक गांव पहुंचा और स्कूल में टीचर के पद पर ज्वाइन कर लिया...जो कुछ भी उसके साथ हुआ था वो रह-रह कर उसके दिमाग में घूम रहा था...चाहकर भी वो उस हादसे को भूल नहीं पा रहा था...स्कूल के पास ही एक घर था लेकिन उसमें कोई रहता नहीं था, सब शहर जाकर बस गए थे इसीलिए वो घर शशांक को किराए पर मिल गया था...स्कूल खत्म हुआ और शशांक अपने घर गया...ग्राम प्रधान ने किसी से कहकर घर साफ करा दिया था इसलिए उसे बस अपना सामान ही रखना था...उसने अलमारी में कपड़े सेट किए और बेड पर लेट गया...



अंधेरी रात...तेज आंधी की वजह से घर की खिड़कियां खड़खड़ा रहीं थी...शशांक उठा और खिड़की बंद करने को बढ़ा लेकिन खिड़की के बाहर का नजारा देख उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई...घर के बाहर हर तरफ चिताएं जल रही थी जैसे कि वो किसी कब्रिस्तान में हो...वो घर का दरवाजा खोलने के लिये दौड़ा लेकिन ये क्या...उसके कदम तो बावड़ी की सीढ़ियों की तरफ जा रहे थे...धीरे-धीरे उसका पूरा घर बावड़ी के अंदर समा रहा था...लाशों ने उसका पैर पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया...वो गहराईयों में जा रहा था उसकी सांस थमने वाली थी कि किसी ने जोर-जोर से दरवाजा खटखटाया....

शशांक चौंककर उठा...औह सपना था शशांक बुदबुदाते हुए बोला...कोई बहुत तेज-तेज से दरवाजा खटखटा रहा था...वो दौड़कर उठा और खिड़की से झांका तो देखा एक आदमी टिफिन लिए खड़ा है...शशांक ने खिड़की से ही पूछा कि क्या काम है?

प्रधान जी खाना भिजवाए हैं...आदमी बोला

शशांक ने दरवाजा खोला...वो पसीने से भीगा हुआ था और काफी डरा हुआ था...उसे ऐसा देखकर वो आदमी बोला...

का हुआ बाबू कुछु डरावना देख लिहो है का?

नहीं बस ऐसे ही...शशांक रुमाल से पसीना पोछते हुए बोला...

अच्छा टिफिन खाली कइके देइ दियो...जब तक सिलेंडर नाही मिल जाता है हम लोग खाना भिजवाते रहेंगे...

टिफिन खाली करते वक्त शशांक के हाथ कांप रहे थे ...

आदमी ने फिर से पूछा कि कोई दिक्कत है क्या लेकिन शशांक ने बात टाल दी और पूछा आपका नाम क्या है?

रामदीन वो आदमी मुस्कुराते हुए बोला...

एक बात पूछे बेटा...उस रात में जब आप बावड़ी में गिरे थे तो कौनो दस साल के बच्चा भी देखे थे का?...रामदीन ने शशांक से पूछा...

आप हसोगे लेकिन मुझे तो बहुत बच्चे दिखाई दे रहे थे...सब बहुत डरावने लग रहे थे ऐसा लग रहा था कि वो मुझे कुछ दिखाने की कोशिश कर रहे हैं...मगर आप ये क्यों पूछ रहे हैं? शशांक ने रामदीन से सवाल किया

जिस दिन गोली चली रही हमहूं अपने पोते के साथ मेला मा गए रहे...लेकिन भगदड़ में वो हमसे अलग होई गया और फिर बावड़ी में उसकी लाश मिली रहे...बोलते हुए रामदीन भावुक हो गया...

शशांक ने रामदीन को बताया कि आज उसने फिर से वही सपना देखा...तो रामदीन ने कहा कि अगर वो चाहे तो वो आज उसके साथ रुक सकता है...शशांक को इसमें कोई बुराई नहीं लगी तो वो भी राजी हो गया...

शशांक ने खाना खाया और कमरे में चला गया वहीं रामदीन हॉल में ही सो गया...

रात के करीब 12 बज रहे होंगे तभी शशांक तेजी से दरवाजे की तरफ भागा...शशांक के भागने की आवाजा से रामदीन भी जग गया था और वो भी उसके पीछे भागा...शशांक ऐसे इधर उधर डर के भाग रहा था जैसे कि किसी भगदड़ में हो वहीं रामदीन शशांक को पकड़ने की कोशिश कर रहा था तभी शशांक के मुंह तेज चीख निकली और वो जमीन पर गिर गया...

वो ऐसे तड़प रहा था जैसे कि उसे गोली लगी हो...रामदीन ने शशांक को पकड़ लिया और उठाकर घर के अंदर लेकर गया...उसने उसके मुंहपर पानी की छींटे मारी...जिसके बाद शशांक की आंखें खुली...वो बहुत डरा हुआ था...उसने रामदीन से कहा...

मैं समझ गया मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है…

मैं समझ गया कि वहां क्या हुआ था...

रामदीन को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था...उसने शशांक को झकझोर के पूछा... का पता चल गवा बाबू? हमहू का बताओ…

शशांक ने कहा ये बताओ जिन-जिन लोगों की उस हादसे में मौत हुई थी उनके परिवार वालों को कुछ मुआवजा वगैरा मिला था कि नहीं?

हां मिला रहे ना...चौधरी जी सबका बीस-बीस हजार रुपइया देहे रहे...वही के बाद तो वो प्रधानी के चुनाव जीते रहे...बहुते नेक आदमी हैं वे तबही तो देखो तुमरे लिए खाना भी भिजवाए।

कोई अच्छे आदमी नहीं हैं वो उस दिन जो भगदड़ हुई थी और सैंकड़ों लोगों की जानें गई थी उसका जिम्मेदार वही है...उन्होंने गोली इस वजह से चलाई ताकि फिर वो लोगों की मदद करके हमदर्द बने और फिर लोग उनसे खुश होकर उन्हें वोट दें...शशांक गुस्से में बोला...

ई का बोलत हो बाबू हमरे तो कुछु समझिन मा नाहीं आवत है...रामदीन सिर पर हाथ रख कर बैठ गया...

शशांक ने कहा सब समझ में आ जाएगा लेकिन तब तक आप इस बारे में किसी से बात नहीं करोगे आपको आपके मरे हुए पोते की कसम है...

रामदीन मान गया

शशांक ने पूछा जब मूर्ति विसर्जन होता था तब वहां वीडियो रिकॉर्डिंग भी होती थी ना?

हां होत रहे और फिर ऊ विडियो एक साथ गांव वालों का इकट्ठा करके दिखाए जाए... जिससे कि जै हुआ नाही जाय पाए है वै सब भी विसर्जन के आनंद लै लिहैं....रामदीन बोला

शशांक: अच्छा वीडियो कौन शूट करता था?

रामदीन: अपने ही गांव का कैलाश रहा

शशांक: तो क्या वो वीडियो दिखाई गई थी?

का बात करत हो बाबू वह दिन के हादसा कैसे कोई का दिखावा जात...कितना जन के परिवार के लोग मर गहे रहे ऊ हादसा मा...रामदीन फिर से भावुक होते हुए बोला

शशांक: अच्छा ये कैलाश कहां मिलेगा?

आजकल शहर मा वोहकर दुकान चले लाग है तो ऊ अब वहीं रहत है...रामदीन ने कहा

बातों-बातों में कब सुबह हो गई दोनों को पता ही ना चला...

आज शशांक स्कूल ना जाकर सीधे शहर गया...वहां उसने कुछ पूछताछ की तो कैलाश के स्टूडियों का पता मिल गया...

शशांक ने कैलाश से उस दिन का वीडियो मांगा...पहले तो कैलाश ने कहा कि वो वीडियों उसका एक दोस्त शूट कर रहा था लेकिन वो भी वहीं मारा गया तो वीडियो उसके पास नहीं है...लेकिन कुछ पैसे देने पर उसने उस वीडियो को पेनड्राइव में करके शशांक को दे दी...शशांक शाम होने से पहले ही गांव पहुंच गया और रामदीन के घर गया...

उसने रामदीन से कहा कि वो पूरे गांव वालों को इक्ट्ठा करे और कहे कि आज शाम को एक फिल्म दिखाई जाएगी स्कूल में, सभी का आना जरूरी है...रामदीन तुरंत गांव वालों को इक्कठा करने निकल गया वहीं शशांक भी अपने घर चला गया...

शाम हुई स्कूल में धीरे-धीरे गांव वाले इक्ठ्ठा होने लगे...शशांक और रामदीन पहले ही वहां पहुंच चुके थे...

शशांक शहर से प्रजेक्टर लेकर आया था...एक पर्दा लगाया गया और फिर लेपटॉप में पेनड्राइव लगाकर उसे प्रोजेक्टर से जोड़ दिया...पर्दे पर विसर्जन का विडियो चलने लगा...लोग बैंडबाजे की धुन पर नाच रहे थे...वीडियो देख प्रधान चिल्लाए...

ये क्या बेहुदा मजाक है...गांववालों की भावनाओं से खेलने में तुम्हें शर्म नहीं आई...और तुम रामदीन तुम भी इस में शामिल हो...

प्रधान के कहने पर लोग वहां से उठकर जाने लगे तभी आवाज आई...

तभी गोलियों की आवाजा सुनाई दी...लोग आवाज सुनकर वहीं रुक गए...ये आवाज वीडियो से आ रही थी....

बावड़ी में हो रहे विर्सजन के दौरान प्रधान कुछ लोगों पर गोली चलाता है और वहां भगदड़ मच जाती है...वीडियों में प्रधान एक गोली खुद के पैर में भी मारता है...

जो विडियो बना रहा होता है भगदड़ में वो गिर जाता है और लोग उसे कुंचलकर भाग रहे होते हैं... तभी कैलाश आता है और कैमरा उठाकर भागता और कैमरा बंद कर देता है...

वीडियो खत्म होते ही सब प्रधान की तरफ घूरते हैं तभी एक औरत आती है और प्रधान को खींच के चांटा मारती है...प्रधान का लड़का बंदूक निकालने की कोशिश करता है लेकिन तबतक लोगों ने उसे पकड़ लिया...

गांव वाले रस्सी लेकर आए और दोनों को बांध दिया गया...

किसी ने कहा कि इन्हें पुलिस के हवाले कर देते हैं...तो कोई बोला कि अरे पैसे देकर फिर से बाहर आ जाएंगे...

तभी रामदीन बोला...इन्हें खूनी बावड़ी के हवाले कर देते हैं वही इन्हें सजा देगी...इस बात पर गांववाले सहमत हो गए...सभी लोग प्रधान और उसके बेटे को लेकर खूनी बावड़ी पहुंचे...रात का समय चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था लोग बावड़ी के पास पहुंचे और उसकी सीढ़ियों पर प्रधान और उसके बेटे को खड़ा कर दिया...तभी बावड़ी में से कुछ हाथ उभर के बाहर आए वो प्रधान को अपनी तरफ खींचने लगे प्रधान नें वहां से भागने की कोशिश की लेकिन उन हाथों की पकड़ इतनी मजबूत थी कि वो हिल भी नहीं पा रहा था....

प्रधान का बेटा बगल में ही खड़ा था और लोगों से मदद की गुहार लगा रहा था...साथ ही वो अपने किए की माफी भी मांग रहा था...लेकिन गांववालों ने उसकी एक ना सुनी...धीरे-धीरे प्रधान बावड़ी के अंदर डूब गया, थोड़ी देर तक उसमें से चीखने चिल्लाने की आवाज आई लेकिन फिर वो भी शान्त हो गई...

अब प्रधान का शव बावड़ी में तैर रहा था...

शायद खूनी बावड़ी ने प्रधान के बेटे को माफ कर दिया था इसीलिए गांव वालों ने भी उसे माफ कर दिया...

लोग वहां से वापस आ गए...अगले दिन प्रधान का अंतिम संस्कार कर दिया गया...

उस दिन के बाद से शशांक को कभी डरावने सपने नहीं आए...वहीं प्रधान के बेटे ने बावड़ी के बगल में देवी मां का मंदिर बनवा दिया...अब वहां फिर से मेला लगने लगा है और लोग बिना कसी डर के धूमधाम से वहां पर मूर्ति विसर्जन करते हैं।