दोस्ती में प्यार का त्याग


दोस्ती-प्यार और त्याग



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आज मेरी आंखें केवल मोहित को खोज रही थी,फर्स्ट इयर का रिजल्ट घोषित कर दिया गया था,

मेरी दूसरी पोजीशन थी, पहले पर कौन है यह मुझे पता करना था... मुझे सबसे ज्यादा चिंता मोहित की हो रही थी...बहुत बद किस्मत था वो, कहने को तो मां बाप बहन बहनोई सब थे... लेकिन पराए से भी गया गुजरा था...पता नहीं क्या कमी थी उसमें जो इतना उपेक्षित था वो...

एक दिन मैं कुछ नोट्स लेने उसके घर पहुंच गई

उनकी मां ने मुझे ऐसे घूर कर देखा जैसे मैंने कोई गलती कर दी हो...मोहित ने मुझे नोट्स दिया और चाय पीने का आग्रह किया, मगर मेरी वहां ज्यादा देर रूकने की हिम्मत नहीं हुई...

पता नहीं क्यों मुझे उसके घर जाकर बड़ा अजीब सा लगा... उसके ड्राइंगरुम में एक लड़का और एक लड़की बैठ कर चाय पी रहे थे और मोहित की मां उस पर बड़ा प्यार लुटा रही थी...

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जब मैं वहां गई थी तो मोहित उन लोगों के साथ नहीं था अंदर से निकल कर आया था...

दूसरे दिन कॉलेज आने पर मैंने उस लड़के और लड़की के बारे में पूछा तो मोहित ने बताया कि

वे उसके दीदी जीजा जी थे... मोहित ने यह भी बताया कि सारा घर उन्ही दोनों के इशारों से चलता है...जब मैं मोहित से मिली थी तो वह बहुत चुप रहता था...

मेरी और उसकी दोस्ती को अभी मुश्किल से चार महीने हुए थे...कॉलेज में फंक्शन की तैयारी चल रही थी, सीनियर्स ने मुझ पर बहुत काम डाल दिया था और रौब भी दिखा रहे थे कि समय से काम पूरा होना चाहिए... मैं बहुत परेशान थी कुछ सामान लाना भूल गई थी अब तो डर के मारे मेरी हालत खराब थी...तब तक मुझे मोहित दिखाई दिया मेरे साथ ही क्लास करता था लेकिन इतना शांत रहता था कि इससे पहले उसके ऊपर मेरा ज्यादा फोकस नहीं था... हां शक्ल से तो मैं उसको पहचानती थी...

वह कॉलेज की सीढ़ियों पर बैठा हुआ था मैंने उससे सामान लाने के लिए रिक्वेस्ट किया वो तैयार हो गया...

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फंक्शन खत्म होने के एक हफ्ते बाद कॉलेज खुला... मुझे मोहित दिखाई दिया तो मैंने उसको रोक कर मेरी सहायता करने के लिए थैंक्स कहा वो एकदम सीधे बच्चे की तरह भोलेपन से कहा अरे नहीं इसमें थैंक्स की क्या बात इसी बहाने से किसी ने मुझसे ढंग से बात तो किया...

मैंने हंसते हुए कहा ऐसी बात है तो मैं रोज आप से बात करूंगी... उसने फिर उसी भोलेपन से कहा जी शुक्रिया...उसके बाद से पता नहीं क्यों मेरी आंखे रोज़ मोहित खोजती मुझे उसकी आंखों में दर्द छुपा हुआ दिखाई देता था... मुझसे बात करता तो उसके चेहरे पर थोड़ी रौनक दिखती थी...

अब तक तो मेरी सहेलियों को भी भांप लग गई थी कि मैडम मोहित की तरफ आकर्षित हो रही है... एक दिन मैं उससे बात कर रही थी मुझे उससे कुछ नोट्स चाहिए था, क्योंकि वो इधर उधर की बातों में रहता नहीं था केवल अपनी पढ़ाई पर फोकस करता था तो उसके नोट्स बहुत अच्छे होते थे...तब तक मेरी सहेली नव्या उधर से गुजरी और मुझे पिंच करते हुए बोली क्यो मैडम जी आपका अनाथ आश्रम खोलने का बिचार है क्या...सारे हैंडसम में यही जनाब तुमको मिले हैं ...कितनों को घायल करके भोले भंडारी से दिल लगा बैठी...उन बिचारे मजनुओं का क्या होगा जो तुम्हारे एक हां के इंतजार में बैठे हुए हैं... वो बेचारा राजीव केवल तुम्हारे लिए बुखार में भी कालेज आ जाता है... मैंने उसको एक चपत लगाई और पीछे मुड़ी तब तक वो नोट्स लेने के लिए घर आने को कहकर चला गया... मैंने गौर किया कि उस दिन वो बहुत उदास था मुझे उसके लिए बहुत बुरा लग रहा था... छुट्टी होने पर मैं मौका निकाल कर उसके पास गई उससे मेरी सहेली की बात पर बुरा न मानने के लिए रिक्वेस्ट किया... उसने फिर उसी अंदाज में कहा अरे बुरा क्या मानना ये सब सुनने की तो मेरी बचपन से आदत हो गई है आप उसके लिए मत परेशान हो...

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मैं कॉलेज से घर आ गई लेकिन मेरा मन बहुत बेचैन था कि आखिर ऐसी कौन सी बात है जिसकी वजह से वो इतना परेशान हैं, मैं और उसकी तरफ खिंची चली जा रही थी...

दूसरे दिन जब मैं उसके घर नोट्स लेने गई तो मेरा सामना मोहित की मां से हुआ उनसे मिलने के बाद मैं और मोहित की तरफ फ़िक्रमंद हो गई कि

कुछ तो बात है वरना मोहित पढ़ाई-लिखाई में तो अव्वल था ही और कभी किसी की फालतू बातों में भी नहीं पड़ता था... जब से मैंने उसे समय देना शुरू किया तभी से बाकी लोग भी उसको जानने लगे थे वरना क्लास करने के सिवा उसको कभी किसी ने नहीं देखा था...

आज रिजल्ट आने के बाद मेरी आंखें मोहित पर ही टिकी हुई थी वो कहीं दिखाई नहीं दे रहा था...फिर सारी सहेलियां मिलकर मूवी देखने का प्लान करने लगी मैंने जाने से मना किया तो सब ने मुझे फिर चिढ़ाना शुरू कर दिया, मैडम अब मूवी नहीं किसी सत्संग में जाएगी दिल भोलेभंडारी से जो लगा बैठी है इनको अच्छे से पता है न कि हम लोग इनके बगैर नहीं जा सकती... मेरी एक सहेली रितिका जो मुझे बहुत अच्छे से जानती है वो भी मेरे इस तरह के व्यवहार परेशान हुई मुझे झिंझोड़कर बोली मैडम होश में तो हैं आप....?क्या होता जा रहा है तुझको यार ऐसा क्या है उस लड़के में जो तू उसके पीछे पागल हूई जा रही है...

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मेरी आंखें थोड़ी सी भर आई थी पता नहीं क्यों उसके खिलाफ कुछ भी सुनना मुझको अच्छा नही लगता था और आज इतने जरूरी समय पर भी वो नहीं आया...

रितिका मुझको भांप गई थी उसने बाकी सहेलियों से कहा तुम लोग मूवी देखने चलें जावो मैं इसको लेकर घर जाती हूं...इसका मूंड ठीक नहीं है... हालांकि बाकी सहेलियों का मूंड भी मेरी वजह से खराब हो गया था फिर भी वो लोग मूवी देखने चली गई... मैं और रितिका घर वापस लौटने की तैयारी में थी तभी मुझे मोहित दिखाई दिया मैं एकदम से उछल पड़ी उसके पास लगभग दौड़ते हुए पहुंची.. और थोड़ा गुस्से में बोली कहां रह गए थे तुम, रिजल्ट की चिंता नहीं थी तुम्हें... उसने कहा चिंता थी तभी तो आ गया जब खुशी और गम अपने तक ही रखना है तो समय का कैसा महत्व...अब तक पीछे से रितिका भी आ गई थी... मैंने मोहित से उसकी पोजीशन पूछी तो उसने बताया कि पहली पोजीशन है मैं बिल्कुल उछल पड़ी मुझे लगा मैं ही प्रथमआई हूं...

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मैंने मोहित से अपने घर चलने के लिए आग्रह किया तो उसने मना कर दिया लेकिन रितिका के बहुत कहने पर वो तैयार हो गया...हम लोग घर आ गए मां से चाय बनाने को कहकर मैं सब को लेकर अपने कमरे में आ गई...कोई खास आता था तो मैं ड्राइंगरुम में न बैठकर अपने कमरे में ही बैठती थी... रितिका साथ में थी तो मां को कोई एतराज़ भी नहीं हुआ...मां चाय नाश्ता लेकर आई और रितिका के ऊपर गुस्सा दिखाते हुए कहा कि कितने दिनों बाद आंटी की याद आई है देख तेरे लिए बढ़िया नमकीन बनाई है, रितिका ने सॉरी कहा और नमकीन के लिए थैंक्स बोल कर मां के बनाए हुए नमकीन पर टूट पड़ी मां ने मोहित का भी हाल चाल पूछा मैंने मां को बताया कि ये मेरा क्लासमेट है आज फर्स्ट आने की खुशी का में मैं आज यहां लेकर आई हूं...मां ने मोहित को ढेर सारी शुभकामनाएं दी और अंदर जाकर मिठाई लेकर आई और अपने हाथ से खिलाया... मेरी मां बहुत ही स्नेहिल स्वाभाव की है मेरी सारी सहेलियां मां को बहुत प्यार करती है...मैंने देखा कि मिठाई खाते समय मोहित की आंखें भर आई थी...हम लोग चाय पी रहे थे तभी दरवाजे पर घंटी बजी, आज पापा भी आफिस से जल्द ही घर आगए थे... मेरे पापा स्टेट बैंक में मैनेजर पद पर कार्यरत है... मेरे पापा भी बहुत ही खुश मिजाज है मेरे सभी दोस्त पापा से घुले-मिले है...हम लोगों को कमरे देखकर पापा भी आकर बैठ गए... एक लम्बी सांस लेकर बोले.…आज बहुत थक गया था तो सोचा ‌चलो थोड़ा जल्दी निकल लेते हैं...मोहित की तरफ देख कर बोले आप से तो पहली बार मिल रहे हैं बेटा, कहीं आप विष्णु शर्मा जी के बेटे तो नहीं है, जी अंकल जी लेकिन आप को कैसे पता पापा ने हंसते हुए कहा अरे भाई हम दोनों एक ही साथ पढ़े हुए हैं और तुम्हारी शक्ल तो हूबहू शर्मा जी से मिल रही है... पापा को देख कर लगा कि वो कुछ बोलते बोलते चुप हो गए...

मैंने गौर किया कि मोहित के चेहरे का रंग बदल गया वह चलने के लिए बोल कर कि घर में सब इंतजार कर रहे होंगे निकल गया...

रितिका भी जानें के लिए तैयार हो गई...

दोनों अपने घर चले गए पापा भी आराम करने चले गए...

शाम को खाने की मेज पर पापा ने मां को बताया कि ये जो लड़का आज घर पर आया था मेरे बहुत अजीज मित्र का बेटा है, लेकिन इसकी मां कोई और है, विष्णु जी शादीसुदा होते हुए और एक बेटी के पिता होने के बावजूद एक तलाकशुदा लड़की के प्यार में पड़ गए...हम लोगों ने बहुत समझाया लेकिन कहते हैं न कि प्यार अंधा होता है हालांकि वह लड़की सिर्फ विष्णु जी के पैसों से प्यार करती थी उस समय विष्णु जी एक जाने माने रेलवे के ठेकेदार थे इधर काफी दिनों से मुलाकात नहीं हुई तो उनके बारे में कोई खास जानकारी भी नहीं है...

एक बार कुछ ऐसा संयोग हुआ कि वह लड़की और विष्णु जी की बीवी दोनों एक साथ मां बनने वाली हो गई... विष्णु जी की तो हालत देखने लायक थी उस लड़की के भी उसकी मां के सिवा कोई भी नहीं था इसलिए वह सब कुछ जानते हुए भी चुप थी उसे भी बिना मेहनत के पैसों की आदत लग गई थी,

विष्णु जी की बड़ी मिन्नतों के बाद भी वह मां बनने के फैसले पर अडिग रही, उसे तो किसी भी तरह से विष्णु जी की प्रापर्टी पानी थी...

समय आने पर दोनों को एक साथ एक अस्पताल में भर्ती कराया गया मैं और मेरे दो अजीज दोस्त विष्णु जी का साथ निभाने में लगे हुए थे... हम लोगों ने फैसला किया था कि किसी तरह इस परिस्थिति से निपटने के बाद कुछ आगे का सोचते है... घर में मीटिंग का बहाना बनाकर तुमसे सब कुछ छिपाकर विष्णु जी की समस्या हल करने में लगे थे... कहते हैं न कि समय बहुत बलवान होता है। डिलेवरी के समय भाभी जी की तबियत बहुत खराब हो गई बहुत कोशिश करके भी बच्चे को नहीं बचाया जा सका भाभी जी तीन दिन तक बेहोशी की हालत में थी और उधर उस लड़की ने एक स्वस्थ बच्चे की जन्म दिया...

भाभी जी की हालत बहुत नाजुक थी डॉक्टर ने किसी भी तरह से बच्चे के न होने की खबर को छुपाए रखने की सलाह दी...हम सब लोगों ने मिलकर उस लड़की को भाभी जी की हालत के बारे में बताया और उसको बहुत समझाया कि यह बच्चा भाभी जी को सौंप दे इसमें दोनों की भलाई है खैर बहुत समझाने पर वह मान गई... उसने बच्चे को सौंप दिया... डॉक्टर से बात किया कि भाभी जी को बचाने के लिए उनकी सहेली अपनी सहमति से अपना बच्चा देने को तैयार हैं... तीन दिन बाद भाभी जी की हालत में सुधार होने लगा एक हफ्ते तक भाभी जी डॉक्टर की देखरेख में रही उसके बाद घर आ गई बेटे को पाकर बहुत खुश थी... बच्चा देने के बाद उस लड़की का आजतक नहीं पता चला कि वह कहां चली गई

तीन साल तक सब कुछ ठीक रहा... एक दिन भाभी जी बच्चे को लेकर उसी अस्पताल में गई थी...अचानक एक नर्स आई भाभी जी को पहचान गई और उसने भाभी जी से कहा बड़ा प्यारा बच्चा है आपकी सहेली का... बहुत बड़ा दिल था आपकी सहेली का बरना कौन इतना बड़ा त्याग करता भाभी जी कुछ समझी नहीं फिर उस नर्स ने पूरी बात भाभी जी को बताया...उसके बाद तो विष्णु जी की बहुत बुरी हालत हो गई थी हम लोगों ने भी भाभी को बहुत समझाया कि शर्मा जी ने जो भी किया आपकी जिंदगी बचाने के लिए किया लेकिन नफरत का बीज इतनी आसानी से नहीं निकलता धीरे धीरे भाभी जी को उस लड़की से शर्मा जी के रिश्ते की बात भी पता चल गई...

हालांकि उसके बाद वह कहां चली गई आज तक किसी को भी नहीं पता चला... लेकिन शर्मा जी को उनके किए की तरह मिल चुकी थी... भाभी जी से उनका रिश्ता केवल सामाजिक तौर पर रह गया था... बच्चे के प्रति भी भाभी जी का व्यवहार करीब करीब सौतेला ही हो गया था...

धीरे धीरे हम लोग अपनी अपनी गृहस्थी में व्यस्त हो गए, आज उस बच्चे को देख कर ऐसा लगा मानो कल की ही बात है...

यह सब सुन कर मेरी समझ में आ गया कि वह इतना उदास क्यों रहता है...

दूसरे दिन मैंने अपनी सहेली रितिका को सारी बात बताई फिर हम दोनों मोहित से मिलने उसके घर पहुंच गए... मोहित ने बताया कि मम्मी आज घर पर नहीं है हम दोनों ने राहत की सांस ली... बातों ही बातों में मोहित ने भी सारी बातें बताई और कहा कि अगर आप को पसंद आए तभी मुझसे दोस्ती करिए वरना तो अब अकेले रहने की मेरी

आदत पड़ गई है... मैंने और मेरी सहेली ने उसको समझाया कि अब आप अकेले नहीं हैं हम दोनों आपकी ताकत है...पढ़ाई में तो वो अच्छा था ही और हम दोनों के सपोर्ट से बहुत आगे निकल गया

उसको सरकार की तरफ से विदेश जाकर पढ़ाई करने का मौका मिल गया... पढ़ाई पूरी करने के बाद दुबई की एक बहुत बड़ी कम्पनी में नौकरी करने का अवसर मिला... अबतक मेरी भी पढ़ाई पूरी हो चुकी थी बी.टेक.करके मैं भी एक कम्पनी में नौकरी करने लग गई थी...

मेरी सहेली रितिका अबतक उसके बहुत करीब आ चुकी थी, रितिका के पापा नहीं थे मैंने उसकी मम्मी से बात किया मोहित के बारे में पूरी बात बताई वो तैयार हो गई...मेरे पापा ने मोहित के पापा से इस रिश्ते के लिए पूछा तो पापा को पकड़कर फूट-फूट कर रोने लगे बोले पहले तुमने मुझे सम्भाला अब तुम्हारी बेटी ने बाकी का काम पूरा कर दिया। कम से कम अब निश्चंत होकर इस दुनिया से विदा ले लूंगा, अपने पापो की सजा तो मुझे मिल चुकी है कम से कम तुम्हारी बेटी की वजह से मेरा बेटा पापा भुगतने से बच गया...आज फिर से एक सहेली दूसरी सहेली के लिए त्याग करने जा रही थी...

मोहित और रितिका की शादी में मैं खूब नाची

दिल के एक कोने में इस त्याग पर मुझे बहुत खुशी थी...

समाप्त

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