झील सी गहरी आंखों का राज: horror story

सागर जैसी आंखों वाली



मां पापा से कहकर फॉर्म पर साइन करा दो...मैंने मां से कहा...

क्यों तू खुद नहीं कह सकता अपने पापा से...मां गुस्से में मुझसे बोली...

मैं समझ चुका था कि ये किचकिच फिर से शुरू होने वाली है इसीलिए मैं बिना साइन कराए ही फार्म लेकर चला गया...

दरअसल वनस्पति विज्ञान के विषय में ही हमारा टूर केरला जा रहा था और वहां जाने के लिए मुझे पिता जी की परमिशन चाहिए थी...

लेकिन मां और पापा के झगड़ों की वजह से मैं बिना साइन कराए ही फॉर्म ले आया और नकली साइन करके फॉर्म सबमिट कर दिया...

मैं एक बार के लिए केरला ना भी जाता लेकिन मोहिनी जिद कर रही थी कि चलो ना बड़ा अच्छा लगेगा प्रकृति को देखकर..हर तरफ हरियाली ही हरियाली होगी...मैं उसकी बातों में आ गया था...

मोहिनी मेरी कॉलेज फ्रेंड थी...और सब उसे मेरी गर्लफ्रेंड समझते थे...लेकिन ऐसा कुछ था नहीं बस सबके ख्याली पुलाव थे...

खैर चार दिन बाद हमारा टूर जाने वाला था...घर पर मां को पता था कि मैं केरला जा रहा हूं लेकिन और किसी को नहीं पता था...

टूर एक हप्ते का था तो मैंने कुछ टी शर्ट और जीन्स पैक कर लिए थे...

मैं कॉलेज गया तो पता चला कि मोहिनी आज कॉलेज ही नहीं आई थी...मैंने उसे कॉल की तो बोली केरल जाने के लिए शॉपिंग कर गई है...समझ में नहीं आता कि ये लड़कियां इतना शॉपिंग क्यों करती हैं...क्लास खत्म करके मैं घर वापस आया तो देखा मां और पापा का झगड़ा चालू था...मैं कमरे की तरफ जाने लगा तो पापा ने मुझे बुलाया और मुझपर चिल्लाते हुए बोले कि किसकी परमिशन लेकर तुम जा रहे हो?...

मैंने गुस्से में बोल दिया कि 22 साल का हो गया हूं और अब अपना डिसीजन खुद ले सकता हूं...

पापा ने साफ मना कर दिया कि नहीं जाना है केरल...

मैंने वजह पूछी तो कुछ भी ना बोले और निकल गए...मैंने मां कि तरफ देखा तो वो भी बिना कुछ बोले निकल गई....

मेरे दिमाग में उथल-पुथल होने लगी...कभी गुस्से से अपनी किताबें फेंकता तो कभी फोन पटकता...रात हुई खाना खाया और फिर वापस अपने कमरे में चला गया..इस बीच हम तीनों में कोई बात नहीं हुई...

टूर के ट्रेन सुबह पांच बजे की थी...मैं चुपके से घर से बारह बजे ही निकल गया...

स्टेशन पर और लोगों के आने का इंतजार कर रहा था...

नींद आने लगी थी तो मैं चाय पीने के लिए स्टाल पर गया...वहां से पांच रुपए की चाय खरीदी और वहीं खड़े होकर पीने लगा...बगल में दो लोग आपस में बात कर रहे थे...वैसे तो मुझे दूसरों की बातों को सुनने का कोई शौख ना था लेकिन वो किसी मंदिर की बात कर रहे थे तो मेरा ध्यान उनकी बातों की तरफ खिंच गया...पहला आदमी बोला...भाई इस बार मैं अपने बेटे की नौकरी मांगकर आउंगा...भगवान ये मुराद भी पूरी करेंगे...मैं सोचने लगा कि भला भगवान किसी की नौकरी कैसे लगवा सकते हैं...तभी दूसरा आदमी बोला...अम्मा का ऑपरेशन अच्छे से हो गया नहीं तो भला कैंसर से भी कोई बच पाता है...इस बार फिर से अम्मा की लम्बी आयु मागूंगा...

मेरे हंसी निकल गई...मुझे हंसता देख वो दोनों मेरी तरफ देखते हुए बोले क्यों भाई कोई मजाक किया है क्या जो आप हंस रहे हो...मैंने कहां नहीं नहीं भाई बस ये सोचकर हंस रहा हूं कि कितना अंधविश्वास है आप दोनों को...तभी पहला आदमी बोला...भाई अब तुम कुछ भी समझो, हमारी तो आस्था है...

मैं चुप हो गया...तभी दूसरा आदमी बोला...क्यों भाई कहां जा रहे हो?

मैंने कहा केरल...

तो वो बोले बड़ी जल्दी आ गए...तुम भी हमारी तरह दूसरे शहर से आए हो क्या?

मैंने झूठ बोला और हां में अपनी गर्दन हिला दी...

वो दोनों बोले भाई केरल जा रहे हो तो भगवान विष्णु जी के मंदिर जरूर जाना...भगवान सारी मुराद पूरी करते हैं...

पता नहीं क्या जादू था उन दोनों की आवाज में कि बिना मंदिर जाए ही मेरी आस्था उस मंदिर के लिए बढ़ गई और मन ही मन प्लान बना लिया कि उस मंदिर तो जरूर जाऊंगा...

सुबह के चार बज चुके थे सारे बच्चे और टीचर आने शुरू हो गए और फिर मोहिनी भी आ गई...मैं मोहिनी के पास गया और उससे चाय पीने के लिए पूछा...मोहिनी ने कहा कि वो घर से पीकर आई है...

एक घंटे बाद ट्रेन आ गई और सब लोग ट्रेन पर चढ़ गए...मेरी बर्थ और मोहिनी की बर्थ पास में ही थी...मैं बर्थ पर लेटते ही सो गया...मोहिनी ने कई बार मुझे जगाने की कोशिश भी की और कहने लगी मैं ट्रेन की खिड़की से अच्छे-अच्छे द्रश्य नहीं देख पाऊंगा...मैंने फिर उसे बताया कि मैं रात को ही घर से भाग आया था...मेरी बात सुनकर पहले तो वो चौंक गई लेकिन फिर वो समझ गई...

दिन से कब रात हो गई पता ही नहीं चला...सब खा पीकर सो गए थे...एक जगह ट्रेन रुकी मुझे लगा कि कोई स्टेशन होगा...तो मैं चाय पीने के लिए बाहर कि तरफ निकल गया...लेकिन बाहर देखा तो कोई स्टेशन ना था...मैं फिर भी ट्रेन से उतर गया...थोड़ी दूरी पर आग जलती दिखाई दी मुझे लगा कि कोई चाय की टपरी होगी मैं आग के पास पहुंचा तो वहां कोई बैठा हाथ सेंक रहा था...मैं सोचने लगा भला इतनी गर्मी में भी किसी को हाथ सेंकने हैं...उस आदमी की शक्ल नहीं दिख रही थी मुझे बस उसकी पीठ दिख रही थी...मैंने उसके कंधे पर हाथ रखकर पूछा...भाई ये कौन सा स्टेशन है...वो मेरी तरफ मुड़ा...उसका चेहरा पूरी तरह से जला हुआ था...मैं डर के मारे कांप गया...उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और चिल्लाने लगा...कोई नहीं बचेगा...सब मारे जाएंगे...सब के सब मारे जाएंगे...कोई नहीं बचेगा...मैं डर के मारे हाथ छुड़ाकर भागा तब तक ट्रेन चल चुकी थी...


मैं चिल्लाकर भागे जा रहा था...लेकिन मैं ट्रेन तक नहीं पहुंच पाया और मेरी ट्रेन छूट गई...मैं डर से कांप रहा था...पीछे मुड़कर देखने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी...मैंने डरते-डरते पीछे देखा तो वहां कोई ना था...और ना ही कोई आग जल रही थी...अब मेरा डर मेरी जान लेने वाला था......


गुप्प अंधेरा था...हाथ में फोन का फ्लेश जलाए मैं ना जाने किस दिशा में चला जा रहा था...सोच रहा था कि अच्छा हुए कि मैंने फोन को फुल चार्ज कर लिया था लेकिन दुख इस बात का था कि यहां नेटवर्क का नामो निशान तक ना था...इसके साथ ही मेरी जेब में लाइट वाली पेन भी पड़ी थी तो वक्त पर वो भी काम आ जाएगी...


मैं चलने लगा तो मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरे साथ चल रहा है...मैंने फ्लेश से इधर-उधर देखा लेकिन वहां कोई ना था...तभी मुझे कुछ आवाजें सुनाई दी ऐसा लग रहा था जैसे किसी कि पायल की छन-छन हो...मैं मुग्ध होकर उस आवाज के पीछे चलने लगा...थोड़ी ही देर में मुझे एक घर दिखाई दिया...


घर में बस एक लालटेन जल रही थी और आस-आस सिर्फ और सिर्फ जंगल था...मुझे वो जलती हुई लालटेन एक उम्मीद की रोशनी की तरह लग रही थी...मैं घर के पास गया और दरवाजा खटखटाने लगा...थोड़ी ही देर में दरवाजा खुल गया...दरवाजा एक सुंदर ने खोला था...काली साड़ी में खूबसूरत बला लग रही थी...उसके चेहरे की चमक के आगे चांद की रोशनी भी फेल थी...शरीर ऐसा जैसे कि स्वर्ग की अफ्सरा रास्ता भटककर यहां आ गई हो...बड़ी-बड़ी झील सी आंखों में मैं डूबता सा जा रहा था...तभी उसने सुरीली आवाज में कहा...रास्ता भटक गए हैं क्या आप?

मैंने हड़बड़ाते हुए कहा...जी हां मेरी ट्रेन छूट गई है...क्या आज रात के लिए मुझे यहां रुकने की जगह मिल सकती है?...

उसने कहा...हां क्यों नहीं अक्सर ट्रेन छूटने के बाद लोग यहीं आकर रुकते हैं...

उसने मुझसे अंदर आने का इशारा किया...मैं तुरंत अंदर आ गया...घर भले ही बाहर से खंडहर लग रहा था लेकिन अंदर से बहुत ही सुंदर था...मैंने घर में किसी और की भी आवाज सुनी ऐसा लगा कि जैसे कोई दर्द में हो...मुझे लगा कि उसके परिवार का कोई सदस्य होगा...मैं घर में इधर-उधर देख रहा था और उस लड़की के आने का इंतजार कर रहा था...उसे देखकर ना जाने क्यों अलग ही शांति सी मिलती थी...मेरी मनोकामना पूरी होई और वो सुंदरी मेरे सामने पानी का ग्लास लेकर हाजिर हो गई...मैंने पानी पिया और उससे बाथरूम का रास्ता पूछा...वो मुझे अपने साथ बाथरूम तक लेकर गई...क्योंकि घर में बिजली नहीं थी इसी लिए हर जगह मोमबत्तियां और लालटेन ही जल रहे थे...मैं बाथरूम में गया और कर मुंह धुलने लगा...जैसे ही मैंने मुंह धोकर शीशे में देखा मेरे पीछे बेहद डरावनी औरत खड़ी थी...उसके चेहरे को में सही से देख नहीं पाया लेकिन मैंने चौंक गया मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वो गायब थी...मुझे अब फिर से सिसकने की आवाज आ रही थी...मैं आवाज के पीछे गया तो वो एक बंद कमरे से आ रही थी...मैंने दरवाजा खोलना चाहा तो उसपर ताला लगा था...तबतक वो सुंदरी भी मेरे पीछे आ गई...उसे देखकर मैं डर गया...उसकी सागर जैसी आंखें सुर्ख लाल हो चुकी थी...लंबी घनी जुल्फें अब मकड़ी का जाल लगने लगी थी...

मैंने उसे ऐसा देख डरते हुए कहा कि उस कमरे से किसी के रोने कि आवाज आ रही है...उसने अपने डरावने रूप को काबू में करते हुए कहा...कि उसकी मां है वो...उनकी दिमागी हालत ठीक नहीं है इसीलिए कमरे में बंद है...वो मुझे एक कमरे में लेकर गई और बोली कि मैं यहां सो सकता हूं...उसके बाद वो फिर चली गई...उसके जाते ही कमरा बंद हो गया...मैं अब समझ चुका था कि मैं बहुत बुरे जाल में फंस चुका हूं...उसके जाते ही मैं फ्लेश जलाकर बस यहां से बाहर निकलने का रास्ता देखने लगा...मुझे बाथरूम के पीछे एक दरवाजा दिखा...मैंने दरवाजा खोला तो बदबू के कारण मुझे उल्टियां होने लगा...बड़ी फोन के फ्लेश से देखा तो वहां कंकालों का ढेर लगा हुआ था...मैंने अपना मुंह दबा लिया जिससे मेरी चीख ना निकले मुझे चक्कर आने लगे थे....समझ नहीं रहा था आखिर मैं कहां फंस गया... मुझे इस समय बस भगवान ही याद आ रहे थे...मुझे उन दोनों की भी बात याद आई जो मुझे स्टेशन पर मिले थे...मैंने चिल्लाकर कहा है भगवान अगर आज मैं बच गया तो तेरे दर्शन करने जरूर आउंगा...अब आप चाहे मुझपर हंस ही लो लेकिन मैंने सभी धर्म के भगवान से अपने लिए दुआ मांगनी शुरू कर दी...मेरे फोन की बैटरी भी लो होने लगी थी...मुझे फोन बंद होने से पहले वहां से निकलना था...

शव के ढेरों के नीचे से हल्की सी रोशनी आ रही थी...ना जाने क्यों मैं बिना कुछ सोचे शव के ढेरों को वहां से हटाने लगा...और फिर मुझे फर्श पर एक दरवाजा दिखा मैंने दरवाजा खोला तो उसमें सीढ़ियां थी जो अंदर की और जा रही थी...मैं सीढ़ियों से उतरने लगा...नीचे गया तो वहां भी लाशों का ढ़ेर लगा हुआ था...वहां से मुझे एक सुरंग मिली जो सीधे मुझे जंगल की और ले गई...अब में वहां से बाहर आ चुका था...लेकिन मेरे उस सुरंग से बाहर निकलते ही मैंने देखा कि मेरे सामने वो लड़की खड़ी है वो भी छाता लिए हुए...मैं डर के मारे फिर से अंदर की तरफ भागा...उसने मेरे पैरों को पकड़ा और एक झटके में मुझे सुरंग से खींचकर बाहर कर दिया...मुझे काफी चोट लग चुकी थी ऐसा लग रहा थाकि हाथ कि हड्डी भी टूट गई है...सिर से खून निकलने लगा...मैं हिम्मत कर फिर भागने की कोशिश करने लगा...ऐसे में वो लड़की फिर मेरे पीछे भागी और उसके हाथ से छाता छूटकर नीचे गिर गया...चांद की रोशनी उसपर पड़ते ही वो दर्द से चीख उठी उसके शरीर का आकार बड़ा होता जा रहा था...उसके हाथों के नाखून जो पहले सुंदर लग रहे थे अब वो बेहद नुकीले और डरावने लगने लगे...उसके शरीर की एक-एक परत जैसे उतरती जा रही थी वो इंसान से कुछ और ही बनती जा रही थी...उसका ये रूप देखकर मैं वहां से भागने लगा...वो मेरे पीछे-पीछे भागने लगी...मैं एक पेड़ के किनारे जाकर छिप गया...वो मेरे शरीर से गिरे हुए खून को सूंघते-सूंघते मेरे पास आने लगी...मैं अपनी सांसें रोक के छिपा हुआ था...वो मुझे ढूढ़ लेती इससे पहले ही कहीं गोलियां चलने की आवाज सुनाई दी...आवाज सुनकर वो वहां से भाग गई...मैं डर से कांप रहा था...तभी मेरे कंधे पर किसी ने हाथ रखा...मैंने डरकर पीछे देखा तो वहीं आदमी खड़ा था जिसका चेहरा जला हुआ था...उसके हाथ में बंदूक भी थी...उसको देख मैं चीखते हुए वहां से भागा और मेरा फोन भी गिर गया...मैं भागते भागते बहुत दूर निकल चुका था और वो आदमी अभी भी मेरे पीछे भाग रहा था...मेरे अंदर अब भागने की हिम्मत ना बची थी ...शरीर से काफी खून बह चुका था...वहीं हाथ की हड्डी टूटने के दर्द को अब मैं सहन नहीं कर पा रहा था...मैं चक्कर खाकर जमीन पर गिर गया...

जब होश आया तो देखा मैं एक खटिए पर पड़ा हुआ हूं...मेरा हाथ बिल्कुल ठीक था और शरीर पर घाव या चोट का नामों-निशान तक नहीं था...मेरे आस-पास काफी लोग मुझे घेरे हुए है...औरतों के मुंह पे घूघंट हैं तो वहीं आदमियों ने धोती कुर्ता पहन रखा है...मैं डरकर फिर से भागने की कोशिश करने लगा तो वही जले चेहरे वाले आदमी ने मुझे रोक लिया और कहने लगा कि डरने की कोई बात नहीं है अब तुम सुरक्षित हो...मैंने ध्यान से उसका चेहरा देखा तो वो जलने का नहीं बल्कि किसी जानवर के खरोचने का निशान था पूरा चेहरा बिगड़ा हुआ था...आदमी ने मुझे मेरा फोन देते हुए कहा अगर मैं समय पर नहीं पहुंचता तो आज तुम भी उस आदमखोर औरत का शिकार बन जाते...

मैंने कहा लेकिन वो ऐसे कैसे बन गई वो तो बहुत...

सुंदर है ना...उस डरावने चेहरे वाले आदमी ने मेरी बात बीच में काटते हुए कहा...फिर उसने जो मुझे बताया वो अगर मैं किसी और को बताता तो वो मुझे पागल ही समझते...

उस आदमी ने मुझे बताया कि सदियों से वो औरत अपने जाल में लोगों को फंसाती है और फिर मौका पाते ही उनका शिकार कर अपनी भूख मिटाती है...मैंने पूछा कि लेकिन वो ऐसे बन कैसे...तब उसने बताया कि वो एक तांत्रिक की बेटी थी...एक बार उसने तंत्र मंत्र से एक संयासी को अपने बस में कर लिया था जिसके बाद जब संयासी उसके मोह से बाहर निकला तो उसने उस श्राप दे दिया कि उसका ये शरीर चांद की रोशनी में जाते ही आधा इंसान और आधा जानवर में बदल जाए...और तो और कभी भी उसे उसके शरीर से मुक्ति ना मिले...

तब से यहां के लोग बाहर वालों की उस चुड़ैल से रक्षा कर रहे हैं...तुम्हारी तरह मैं भी एक बार यहां फंस गया था औऱ उसने मेरे चेहरे का ये हाल कर दिया वो तो अच्छा था कि गांववालों ने मुझे बचा लिया नहीं मैं भी आज जिंदा ना होता...तब से मैं उस स्टेशन पर रोज रात को बैठता हूं जिससे कि कोई ट्रेन अगर गलती से वहां रुक जाए और कोई यात्री ट्रेन से उतरकर बाहर आ जाए तो मैं उसे डराकर ट्रेन मैं वापस भेज दूं...जब तुम भागे तो मैं वहां से चला गया...लेकिन फिर मैंने चीखने-चिल्लाने की आवाजें सुनी और तुम्हारी मदद के लिए आ गया...

सच में मेरे लिए वो आदमी भगवान का रूप लग रहा था...

मैंने कहा कि मैं उसका घर जानता हूं..हम चलकर उसे पकड़ लेते हैं...तो आदमी ने कहा...कि वो बस एक भ्रम जाल था....

दोपहर को गांव के लोग मुझे बहुत दूर तक साइकिल पर बैठाकर एक बस स्टॉप पर ले गए... जहां मुझे केरल के लिए बस मिल गई...सबसे पहले वहां पहुंचकर मैं विष्णु जी के मंदिर गया...फिर अपना फोन चार्ज करके अपने टीचर को फोन किया...उन्होंने मुझे होटल का पता बताया...मैं पते पर पहुंचा तो मुझे देखकर मोहिनी मुझसे लिपटकर रोने लगी मैंने उसे शांत कराया...सबने मुझसे पूछा कि मैं कहां गायब हो गया था...तो मैंने बस उनसे इतना ही कहा कि मैं सागर जैसी आंखों वाली लड़की के प्यार मैं खो गया था।

दूसरे दिन हम सब जंगल के लिए निकले...जंगलों से मुझे डर लगने लगा था...अरे ये तो वही जंगल है जहां कल रात मैं मरते-मरते बचा था...हां आज इस बात की तसल्ली थी कि मैं अकेला नहीं था और रात भी नहीं थी...टीचर कभी कोई प्लांट तो कभी कोई फ्लावर दिखाती और उसका नाम बताती...कोई कॉपी में सब नोट कर रहा था तो कोई फोन से वीडियो बना रहा था...मैं भी वीडियो बनाने में लगा हुआ था...कि तभी मुझे वो लड़की दिखाई दी....मेरे हाथ से फोन छूटकर नीचे गिर गया...ऐसा लगा कि शरीर का खून जम गया हो हाथ पैर कांपने लगे...बगल में खड़ी मोहिनी ने मुझे संभाला...वो मुझे भीड़ से दूर ले गई और पानी की बोतल दी...पानी पीते वक्त मेरे हाथ कांप रहे थे...मोहिनी ने मुझसे इसकी वजह पूछी लेकिन मैं उसे डराना नहीं चाहता था...मैं खड़ा हुआ और बोला कि भूख की वजह से चक्कर आ रहे हैं...मोहिनी ने कहां कि उसने थोड़ी दूर पर एक खंडहर देखा था चलो वहीं टिफिन खोलकर खाना खाते हैं...मैं मोहिनी की इस बात से सहमत नहीं था...मैं बस भीड़ में रहना चाहता था...लेकिन मोहिन मेरा हाथ पकड़कर जबरदस्ती ले जाने लगी...मुझे फिर से महसूस हुआ कि वो लड़की अभी भी मेरा पीछा कर रही हैै...थोड़ी ही देर में हम उस खंडहर में पहुंच गए...मोहिनी ने टिफिन खोला और हम खाना खाने लगे...तभी मोहिनी के पीछे वो लड़की आकर खड़ी हो गई...उसको देख मैं जोर से चिल्लाया और मोहिनी का हाथ पकड़कर भागने लगा...तभी मोहिनी ने झटककर अपना हाथ छुड़ा लिया और रुक गई...मैंने उससे भागने के लिए बोला तो वो कारण पूछने लगी...एक ही सांस में मैंने उसे पूरी बात बताई तो मुझपर जोर-जोर से हंसने लगी...मैंने फिर से उसका हाथ पकड़ा और वहां से भागने लगा...हम उसी जगह पहुंच गए जहां हमारा ग्रुप था...लेकिन यहां तो कोई था ही नहीं...शायद सब जा चुके थे...मैं फिर से जंगल में खो गया था।

मैं मोहिनी पर चिल्लाने लगा कि सब तुम्हारी वजह से हुआ है...तभी मोहिनी ने फोन निकाला और टीचर को फोन लगाने लगी...
टीचर ने फोन उठाया तो पता चला कि उनसे किसी ने कह दिया था कि हम दोनो वापस होटल चले गए है...
उन्होंने कहा कि होटल पहुंचकर वो वापस बस को भेजती हैं तब-तक हम वहीं रुके...

शाम हो गई थी...मेरा डर बढ़ता जा रहा था...मैं मन ही मन दुआ कर रहा था कि बस जल्दी आ जाए...लेकिन होटल से जंगल आने में बस को तीन घंटे लगने वाले थे और तबतक मुझे इस डर से लड़ना था...मैंने अपना फोन निकाला और उसमें गाने बजाने शुरू कर दिए...तभी मोहिनी ने मेरा फोन बंद करते हुए कहा...

तुम्हें पायल की झनकार सुनाई दे रही है क्या?
मैंने ध्यान से सुना तो सच में पायल की छन-छन की आवाज आ रही थी...मुझे झाड़ियों की तरफ हलचल सुनाई दी...मैंने ध्यान से देखा तो वही लड़की खड़ी थी...
मैं मोहिनी को लेकर फिर वहां से भागा...वो लड़की हमारे पीछे-पीछे भाग रही थी...
मोहिनी रुक गई और बोली कि वो मेरी तरह पागल नहीं है जो लड़की से डरे...
वो रुक तभी वो लड़की भी मोहिनी के पीछे रुक गई..

कमाल की बात थी कि वो लड़की सिर्फ मुझे ही दिख रही थी...मोहिनी ने चारो तरफ देखा और पूछा कौन है किससे भाग रहे हो...
तभी वो लड़की आदमखोर जानवर में बदल गई और मेरे सामने ही उसने मोहिनी को नोचकर उसके टूकड़े-टुकड़े कर दिए...
मेरी सांस जैसे रुक सी गई ना मैं चीख पाया और ना मैं भाग पाया मैं मोहिनी  की ऐसी हालत देख वहीं बैठ गया...
अब वो मोहिने के टुकड़ों को नोच नोचकर खा रही थी...उसका ध्यान अब मेरी तरफ नहीं था...पता नहीं मुझमें ये हिम्मत कहां से आई कि मैं दबे पैर वहां से चलने लगा...मैं बिना पीछे देखे बस भागा जा रहा था...तभी एक गाड़ी में मुझे टक्कर मार दी औऱ मैं बेहोश होकर जमीन पर गिर गया...

आज सात साल बाद मेरी आंखे खुली हैं...ये सब कह रहे हैं कि मैं सात साल से कोमा  में था...मोहिनी के बारे में भी बताया गया कि जंगल में वो किसी जानवर का शिकार बन गई औऱ जो बस हमें लेने आ रही थी उसी से मेरा एक्सीडेंट हुआ था...

मैंने अपनी नई जिंदगी के लिए भगवान को धन्यवाद कहा और फिर कभी उस जंगल में ना जाने की कसम खा ली।

समाप्त

1 Comments

Unknown said…
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