अधूरा इश्क पूरा प्यार: Love Story

प्यार, इश्क और शादी




मां मुझे अभी शादी ही नहीं करनी और आप हैं कि मेरे पीछे ही पड़ गई हैं...ये बोलते हुए मैंने अपने कमरे का दरवाजा मां के चेहरे पर बंद कर दिया...मन में बहुत दुख हो रहा था कि मैंने मैं के साथ ऐसा बर्ताव किया लेकिन ऐसा करना जरूरी था...अभी-अभी तो मेरी नौकरी लगी है और अभी से मां मेरी शादी के पीछे पड़ गईं थी...

पिता जी के गुजर जाने के बाद मां ने ही मुझे पढ़ाया और इस काबिल बनाया कि मैं अपने पैरों पर खड़ा हो सकूं और ऐसे में मुझे डर लगता था कि शादी के बाद मेरी पत्नी मुझे मेरी मां से अलग ना कर दे...किसी तरह से रात बीती और सुबह मैं बिना नाश्ता किए ही ऑफिस निकल गया था...ऑफिस में आज कई नए लोगों की ज्वॉइनिंग हुई थी और यही वजह थी कि जो लोग दूसरे शहर से आए थे उनके लिए ऑफिस में ही लंच मंगाया गया था...खैर मैं सीनियर था तो मेरे लिए ऑफिस में कोई पाबंदी ना थी...


लंच के टाइम मैं केंटीन में गया तो देखा केंटीन के हेड एक लड़की को डांट रहे थे कि खाना सिर्फ दूसरे शहर से जिन लोगों ने ज्वॉइन किया है उनके लिए है ना कि इसी शहर में रहने वालों के लिए है...वो लड़की कह रही थी कि उसे नहीं पता था उससे किसी सीनियर ने कहा कि कैंटीन से अपना लंच ले लो तो उसने ले लिया...हालांकि मैं उसको देख नही पाया क्योंकि उसका चेहरा मेरी तरफ नहीं था लेकिन उसकी बातें मुझे साफ-साफ सुनाई दे रही थी...मुझे कैंटीन हेड पर गुस्सा आ रहा था कि भाई अगर गलती से खाना ले लिया तो क्या अब मुंह से निवाला छीन लोगे...


इससे पहले कि मैं कैंटीन हेड के पास जाता वो लड़की हाथ में खाने की प्लेट लिए मेरी तरफ मुड़ी और उसे उसे देखते ही मेरी निगाहें उसी पर टिक गई...
उसकी बड़ी-बड़ी काली गहरी आंखों में आंसू थे जो सीप की मोतियों की तरह उसकी आंखों से बहने की कोशिश कर रहे थे...चेहरे पर एक बच्चे की तरह मासूमियत थी...समझ नहीं आ रहा था कि भला इस मासूम को कोई डांट कैसे सकता है वो भी खाने के लिए...वो खाने की प्लेट को लेकर एक टेबल पर बैठ गई और मुश्किल से एक निवाला ही खाया होगा और खाने प्लेट वहीं छोड़कर चली गई...वैसे भी बेचारी के गले से निवाला नीचे उतरता भी कैसे जिसके लिए उसे इतना सुनाया गया हो...

मैंने अपना खाना खत्म किया और अपने ऑफिस में चला गया...तभी मीटिंग के लिए कॉल आ गई...मैं मीटिंग हॉल में गया तो देखा वो लड़की भी वहां थी उसे देख मुझे एक अजीब सा सुकून मिल रहा था ठीक वैसे ही जैसे प्यासे को पानी देखकर मिलता है...मैं उसे एक टक देखे ही जा रहा था कि तभी सर ने मेरा परिचय मेरी टीम से कराया...जी हां मेरी किस्मत तो देखिए वो लड़की मेरी ही टीम में थी...अब मेरी खुशी का ठिकाना ना था...सबने अपना अपना परिचय देना शुरू किया...

आरोही जी हां आरोही उसका नाम था...मीटिंग के बाद सब अपने-अपने काम में लग गए...मैं अपने कैबिन में बैठा बस आरोही के ख्यालों में गुम था...पहली बार मेरे साथ ऐसा हुआ था जब कोई मुझे पसंद आया था...ना जाने क्या जादू था उन आंखों में कि मैं उसमें डूबता ही चला जा रहा था...उसकी एक झलक से ही मेरा दिल तेजी से धड़कने लगता...शाम हुई तो घर जाकर सबसे पहले मां से माफी मांगी...आज ना जाने क्यों सब बहुत अच्छा लग रहा था...मैं कान में हेड फोन लगाकर गाने सुनने लगा...थोड़ी ही देर में मां ने डिनर के लिए बुला लिए...खाना खिलाने के साथ-साथ मां ने फिर से मेरी शादी की बात शुरू कर दी...इस बार मैंने मां से कहा ठीक है आप पंडित जी कह दीजिए कि रिश्ते देखना शुरू कर दें अगर मुझे कोई पसंद आ गई तो मैं हां कर दूंगा...मां इतनी खुश हुई कि खुशी से उन्होंने मुझे गले लगा लिया....

सुबह हुई...आज मुझे तैयार होने में कुछ ज्यादा ही समय लग रहा था कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि कौन सी शर्ट पहन कर जाऊं...खैर आखिरी में मैंने सफेद शर्ट पहनी और तैयार होकर ऑफिस के लिए निकल लिया...कार में भी रोमॉटिक गाने बज रहे थे जो मुझमें और उर्जा भर रहे थे...ऑफिस पहुंचते ही सबसे पहले आरोही के ही दर्शन हुए...दरअसल वो मेरे कैबिन में मेरा ही इंतजार कर रही थी...उसने सफेद सलवार कमीज पहन रखी थी....उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे को परी अपने सफेद चांदनी जैसे फंख फैलाए मेरे सामने खड़ी है...मैं हड़बड़ाते हुए बोला...तुम यहां क्या कर रही हो?

वो थोड़ा घबराते हुए बोली...वो सर मुझे ये वाली फाइल अधूरी लग रही है...जैसे कुछ डॉक्युमेंट गायब हो इसमें से..

वो मेरे हाथ में फाइल देने लगी और गलती से उसका हाथ जरा सा मेरे हाथ से छू गया...उसके छूते ही जैसे मेरे पूरे शरीर में एक तरंग सी दौड़ गई पहली बार मैंने खुद को ऐसे बैचेन होते देखा था...मन में यही हो रहा था कि मैं बस इसे देखता ही रहूं...वो फाइल देकर चली गई और मैं धम्म से अपने चेयर पर बैठ गया...अब तो हम दोनों में थोड़ी बहुत बात भी होने लगी थी...हमारी पूरी टीम एक साथ लंच करती...धीरे-धीरे ऑफिस में भी खुसपुस होने लगी कि मैं उसे पसंद करता हूं...जब भी मेरी नजर आरोही से मिलती तो वो मुस्कुराती जरूर थी...कभी-कभी लंच के टाइम टीम के कुछ लोग उसे चिढ़ाते तो वो मासूम समझ भी नहीं पाती कि लोग उसके और मेरे बारे में ही बातें कर रहे हैं...

हमारा प्रोजेक्ट खत्म होने वाला था...हमने पूरी टीम के साथ मूवी देखने का प्लान बनाया...मेरे मन में था कि मैं आज उससे अपने दिल की बात कह ही दूंगा...सब मूवी देखने पहुंचे मेरी और उसकी सीट अगल-बगल में ही थी...इटर्वल हुआ तो सब लोग बाहर निकल गए...मैं और आरोही वहीं बैठे रहे...मैं अपने दिल की बात कहना ही चाहता था तभी उसने मुझसे कहा...सर मुझे पता है कि आप मुझे पसंद करते हैं...और आप भी मुझे पसंद हैं...लेकिन मेरे चाचा जी मेरे लिए रिश्ता ढूढ़ रहे हैं और मैं उन्हें दुख नहीं पहुंचाना चाहती ये बताकर कि मैं किसी और को पसंद करती हूं क्योंकि मां और पिता जी के गुजर जाने के बाद उन्होंने ने ही मुझे पाल पोस कर बड़ा किया है और इस लायक बनाया है कि मैं अपने पैरों पर खड़ी हूं...तो सर मैं आपको इसलिए ये सब बता रही हूं कि आप अपने दिल में मेरे लिए कोई आशा या उम्मीद ना रखें...ये बोलते हुए उसके आंखों में आंसू आ गये...मैं बिल्कुल चुप रहा और कुछ नहीं बोला...उसके लिए मेरे दिल में इज्जत और बढ़ गई...लेकिन मेरे सीने में एक अजीब सा दर्द हो रहा था...शायद ये दर्द दिल टूटने का था...जो पहले कभी मुझे महसूस हुआ ही नहीं...इटर्वल खत्म हो चुका था सब लोग आ चुके थे...हम दोनों शांत बैठे थे...तीन घंटे की मूवी मुझे बहुत लंबी लगने लगी थी...मूवी खत्म होते होते रात हो चुकी थी...जिनके पास खुद का वाहन नहीं था उनको घर छोड़ने की जिम्मेदारी मुझे दे दी गई...

सबको छोड़ने के बाद कार में बस मैं और आरोही ही बचे थे...उसे कहा कि कार को एक साइड में रोक लो...मैंने कार रोकी तो वो कार से बाहर आकर खड़ी हो गई...मैं भी कार से बाहर आकर खड़ा हो उसने मुझे गले लगा लिया और रोने लगी...वो रोए जा रही थी...मैं भी खुद के आंसू रो नहीं पाया और रोने लगा...बहुत देर तक एक दूसरे के गले लगकर हम रोने लगे...

फिर हमने एक दूसरे के आंसू पोछे और कार में बैठ गए...मैंने उसे उसके घर तक छोड़ दिया...

आज अपने घर आकर मां से कहा कि मां आपको जिन लड़कियों के रिश्ते पसंद आए हो उनके साथ मीटिंग फिक्स कर दीजिए...

मां ने कहा सॉरी बेटा मैं तुझे बताना भूल गई थी कि मैंने कल एक परिवार से मीटिंग फिक्स की है...वो लोग इसी शहर में रहते हैं तो इसीलिए मैंने कल का दिन चुना क्योंकि कल रविवार है तो तेरी भी छुट्टी है...मैंने कहा ठीक है...ये बोलकर मैं कमरे में चला गया...आज मन बहुत उदास था..क्योंकि अब प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद पता नहीं वो किस टीम में होगी मैं किस टीम में होउंगा...अब तो मैं उसे देख भी नहीं पाउंगा..रात भर मन में यही सब चलता रहा और कब सुबह हो गई पता ही ना चला...

मां तो सुबह से ही तैयारी करने लगी...मुझे भी नहाकर तैयार होने को कहा...हम पास के ही गणेश जी के मंदिर में जाने वाले थे क्योंकि लड़की के परिवार वालों से वहीं मिलना था...

मैं तैयार होकर मां के साथ मंदिर के लिए निकल लिया...आधे घंटे में ही हम मंदिर पहुंच गए...मां ने इशारा किया कि वो वहां बैठे हैं वो लोग...मैं गया और सबके पैर छूने लगा...उन्होंने बताया कि लड़की मंदिर के अंदर भगवान के दर्शन करने गई है...हम उसका इंतजार करने लगे...तभी मुझे आरोही आती दिखाई दी उसने पीले रंग का सूट पहन रखा था...थोड़ी देर तक मेरी निगाहें उसे ही देखती रह गई...लेकिन मैंने डरते हुए अपना चेहरा घुमा लिया कि कहीं वो मुझे देख ना ले ...तब तक मां बोली लो आ गई...मैंने मुड़कर देखा तो सामने आरोही ही खड़ी थी...हम दोनों एक दूसरे को आमने सामने देखकर चौंक गए...थोड़ी देर तक सन्नाटा रहा फिर सन्नाटे को तोड़ते हुए मां बोली कि क्या हुआ कोई भूत देख लिया क्या?...आरोही ने मां के पैर छुए...उसकी आंखे नम थी...मेरी भी आंखे नम थी ऐसा लग रहा था कि भगवान ने उसकी और मेरी दुआ कबूल कर ली थी...हम दोनों को बात करने के लिए घरवालों ने अकेला छोड़ दिया...सबके जाते ही मैंने उसे कसकर गले लगा लिया और रोने लगा...वो भी रो रही थी...मैं भगवान को धन्यवाद दे रहा था...हम दोनों साथ में मंदिर गए और साथ रहने की कसमें खाई...

पढ़ने के लिए क्लिक करें- झील सी गहरी आंखों का राज: horror story

आज वो मेरे सामने है...लाल जोड़े में हाथों में जयमाला लिए वो इतनी खूबसूरत लग रही है कि मैं अपने भाव को रोक नहीं पा रहा हूं और मेरी आखें अपने आप नम हो रही है।

समाप्त

1 Comments

Unknown said…
Shadi k baad fr kia hoga ji